वो करो जो किसी ने नहीं किया

शाम हो चली थी। धीरे – धीरे अन्धेरा छाने लगा। कही – कही मकानों में दीपक की रोशनी चमकने लगी। जगह – जगह बच्चे पटाखे छूटा रहे थे। आसमान में रंग बिरंगे आतिश बाजी छूट रही थी क्योकि आज दीपावली है। बड़े – छोटे सब खुशियाँ मना रहे थे।
एक विधवा माँ का लड़का अपनी झोपडी के सामने बैठा ये सब देख रहा था। वह आसमान में जब रंग बिरंगी आतिश बाजी छूटती देखता था तो उसके दिल में भी आता था की मैं भी दीपावली मनाऊं।
तभी अंदर झोपडी से विधवा माँ की खांसने की आवाज आयी। लड़का दौड़ता हुआ अंदर गया और बोला माँ क्या बात है।
माँ एक हल्की सी चादर ओढ़े चारपाई पर लेटी हुई थी। बेटे को देखकर खाँसती हुई चार पाई पर बैठने लगी।
गर्दन के नीचे हाथ देकर बेटे ने अपनी माँ को बैठा दिया। माँ को भी पटाखे की आवाजे सुनाई दे रही थी। खांसते हुए बोली – बेटा आज दीवाली है। सब दिवाली मना रहे है। दिवाली की खुशियाँ मना रहे है।
बेटे ने धीरे से कहा – हाँ माँ। माँ ने अपने पल्लू की गाँठ खोली उसमे से कुछ पैसे निकाले और बेटे को देते हुई बोली। जाओ बेटा तुम भी दिवाली मनाओ। बेटा खुश हो गया और माँ अपना मुँह ढक कर फिर से लेट गयी।
बेटा पटाखे खरीदने के लिए दूकान की तरफ दौड़ पड़ता है। रास्ते में उसके दिमाग में कई तरह के सवाल उठ रहे थे। पटाखों की आवाज उसके कानो में गूंज रही थी।

कभी उसको अपनी बीमार माँ याद आ रही थी। यह सोचते – सोचते वह पटाखों की दूकान पर जा पहुँचा।
कुछ देर तक वह पटाखों की दुकान को देखता रहा।  साथ ही साथ उसको माँ भी याद आती रही। दुकानदार लड़के की तरफ देखते हुए बोला – क्या चाहिए।
लड़का अपनी खामोसी तोड़ते हुए बोला – कुछ नहीं और दौड़ पड़ा डॉक्टर की दूकान की तरफ।
लड़के ने डॉक्टर से अपनी माँ के लिए खांसी की दवाई ली। बेटा झोपडी के सामने आया ही था। माँ खासते हुए बोली – बेटा पटाखे ले आया, बाहर ही छूटा ले।
बेटा माँ की खाँसी की दवाई देते हुए बोला – माँ ये दवाई लाया हूँ। उसे  ले लो तुम ठीक हो जाओंगे।
यह सुनकर माँ बोली – बेटा मैं ठीक हूँ। तुम्हे पटाखे लाने के लिए कहा था। वे क्यों नहीं लाये। तुम अपनी दीवाली मनाते।
तुरंत ही बेटा बोल पड़ा – माँ तुम ही तो मेरी दीवाली हो, तुम ही तो मेरी ख़ुशी हो, तुम ही तो मेरी पूजा हो।
बेटे की बात सुनकर माँ की आँखों में ख़ुशी के आँशु आ गए और अपने बेटे को छाती से लगा लिया। आज मैं गर्व से लोगो को कहूँगी की यह मेरा बेटा है।
अब आप एक मिनट के लिए सोचो और अपने आप से पूछो। क्या आपके माँ – बाप ने आपके काम को लेकर, कभी किसी को कहा है की मुझे अपने बेटे पर गर्व है।
क्या आपने अपनी जिंदगी में गर्व करने लायक कोई काम किया है। वो करो जो किसी ने नहीं किया|

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