एक अंधे पति और पत्नी की प्रेम कहानी
यह सुनकर संगीता बहुत ही दुखित हुई और खूब रोने लगी , लेकिन दिनेश ने उसको समझाया की इसमे रोने की बात क्या है | में तुम को पहले से भी ज्यादा प्यार करूँगा और अब मुझको तुम्हारा चर्म रोग भी नहीं दिखेगा |
अब दोनों एक साथ रहते और बहुत ही ज्यादा खुश रहते थे , एक दिन संगीता की तबियत बहुत ही खराब हो गयी और वह हमेशा के लिए यह दुनिया छोड़ कर चली गयी | दिनेश खूब रोया और रो – रो कर बीमार हो गया , लेकिन जब वह ठीक हो गया तो फिर से सब कुछ देखने लगा | तभी उसका एक दोस्त मिला और पूछा अरे भाई तुम तो अंधे हो गए थे न फिर कैसे सही हो गए | दिनेश की आँखे नम थी उसने बोला में अँधा नहीं था ,में अपनी पत्नी के लिए यह ड्रामा कर रहा था | जब उसको चर्म रोग हो गया था तब उसको लगता था की वह अब पहले की तरह सुन्दर नहीं है , इस बात से वह बहुत ही उदाश रहती थी , इसलिए मैंने सोचा क्यों न में अँधा बन जाऊ ताकि वह हमेशा खुश रहे | में जानता था की वह अब जी नहीं पाएगी इसलिए उसकी खुशियों के लिए यह सब करना पड़ा |
दोस्तों इस कहानी से में तो यही बोलूंगा की सब लोगो को दिनेश जैसा अच्छा पति और संगीता जैसी पत्नी मिले |
