एक अधूरी उम्मीद



एक अधूरीउम्मीद
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 जब प्यास लगे तो नीर नहीं ,
अब जल कुंभ में प्यास नहीं ll
दुनिया की यही है रीत सुनो,
जब धूप लगे तो छांव नहीं ll
बंजर प्यासी धरती को भी ,
बारिश का आसार नहीं ll
भूखे प्यारे बच्चों को ,
राशन का एहसास नहीं ll
इन रंग बिरंगे महलों से ,
इंसाफ की आस नहीं ll
जिंदा भगवानों के करतब से,
बीमारों को न्यास नहीं ll
सुंदर चितवन से बच के रहना,
कब घात लगे ये ज्ञात नहीं ll
तस्लीम तुम्हारा अच्छा है ,
पर दिल के तुम बेदाग नहीं ll
लड़ते-लड़ते थक जाओगे ,
आलम बदले विश्वास नहीं ll

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